
कोशिश तो है कि सभी प्रसव संस्थागत हों। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग जनजागरुकता अभियान भी चलाता रहता है। बावजूद इसके अब भी तीस से चालीस फीसदी प्रसव गैर प्रशिक्षित दाइयों के भरोसे ही है। कारण प्रसव केंद्रों में महिला डाक्टर और अन्य सुविधाएं न होना है। आपदा के दौरान गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए हेलीकाप्टर से अस्पतालों में लाने के निर्देश दिए गए थे। अब स्थिति यह है कि न ये निर्देश प्रभावी हैं, न सड़कों की स्थिति सही है और न ही प्रसव केंद्रों में महिला डाक्टर और अन्य सुविधाएं ही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के दफ्तरों में पंजीकृत 28594 महिलाओं के सुरक्षित प्रसव को लेकर परिजनों के माथों पर चिंता की लकीरें साफ दिखती हैं।
